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तिरंगा यात्रा के नाम पर मासूमों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप, कई बच्चे बीमार

तिरंगा यात्रा के नाम पर मासूमों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप, कई बच्चे बीमार

चितरंगी में कड़ी धूप में करीब 5 किलोमीटर पैदल तिरंगा यात्रा कराने पर उठे सवाल; बच्चों के अस्पताल पहुंचने का दावा, ऑक्सीजन लेवल कम होने का वीडियो भी सामने आया

अपना विचार समाचार सिंगरौली। चितरंगी में आयोजित तिरंगा यात्रा को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि कड़ी धूप के बीच स्कूली मासूम बच्चों से करीब 5 किलोमीटर तक पैदल यात्रा कराई गई। यात्रा के बाद कई बच्चों के बीमार पड़ने और अस्पताल पहुंचने की बात सामने आई है।

बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था। इसी दौरान तेज धूप और लंबी पैदल यात्रा के कारण कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक बच्ची का ऑक्सीजन लेवल बेहद कम दिखाई देने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि, इस वीडियो और ऑक्सीजन रीडिंग की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

वीआईपी कार्यक्रम या बच्चों की सुरक्षा?

मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए स्कूली बच्चों को इस तरह लंबी दूरी तक पैदल चलाना उचित है? आलोचकों का कहना है कि तिरंगा देश के गौरव और सम्मान का प्रतीक है, लेकिन राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि मंत्री राधा सिंह एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम को सफल दिखाने की होड़ में बच्चों की परेशानी को नजरअंदाज किया गया। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन और आयोजकों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

स्कूल शिक्षा का मंदिर, भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं

इस घटना ने स्कूली बच्चों को सरकारी और राजनीतिक आयोजनों में शामिल किए जाने की व्यवस्था पर भी बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि यदि किसी कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी आवश्यक है तो क्या मौसम, दूरी, पेयजल, विश्राम, मेडिकल टीम और आपातकालीन व्यवस्था की पर्याप्त तैयारी की गई थी?

अपना विचार का सवाल सीधा है—तिरंगा यात्रा देशभक्ति का उत्सव है, लेकिन मासूम बच्चों की सेहत की कीमत पर नहीं। प्रशासन को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने बच्चे बीमार हुए, उन्हें कहां उपचार मिला और यात्रा के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या चिकित्सा एवं आपातकालीन इंतजाम किए गए थे।

तिरंगा हमारा गौरव है, बच्चों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी।

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  • नंदकिशोर पटेल
    प्रधान संपादक एवं प्रकाशक
    भारत सरकार के नियमानुसार पंजीकृत समाचार पत्र के संपादक के रूप में निष्पक्ष, निर्भीक एवं जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित। सत्य, पारदर्शिता और जनविश्वास हमारी पहचान है।

    सत्य • निष्पक्षता • जनहित

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