सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड की धूल से यात्री बेहाल, हाईकोर्ट ने DRM से मांगा जवाब
PIL पर हाईकोर्ट सख्त, पर्यावरणीय नियमों के पालन पर उठे सवाल; 20 अगस्त को अगली सुनवाई

सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड की धूल से यात्री बेहाल, हाईकोर्ट ने DRM से मांगा जवाब
PIL पर हाईकोर्ट सख्त, पर्यावरणीय नियमों के पालन पर उठे सवाल; 20 अगस्त को अगली सुनवाई
अपना विचार समाचार | संवाददाता, सरई/सिंगरौली
सिंगरौली, 15 अगस्त 2026। सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड से उड़ने वाली कोयले की धूल और प्रदूषण का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। स्टेशन परिसर में कोयले की डंपिंग, लोडिंग-अनलोडिंग तथा उससे होने वाले प्रदूषण को लेकर दायर रिट याचिका पर हाईकोर्ट ने रेलवे से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को निर्धारित है।
जानकारी के अनुसार, WP No. 28462/2026 के माध्यम से सरई क्षेत्र के निवासी विनय जायसवाल ने याचिका दायर कर सरई रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर कोयले की डंपिंग एवं लोडिंग-अनलोडिंग से यात्रियों तथा आसपास के ग्रामीणों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया है। याचिका में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित नियमों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं।
DRM से जानकारी लेकर कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश
13 अगस्त 2026 को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया एवं न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान भारत संघ की ओर से उपस्थित अधिवक्ता प्रीति सिंह को पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर मंडल के DRM से आवश्यक निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने के निर्देश दिए।
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता राजवर्धन दत्त पद्रहा उपस्थित रहे। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।
कोयले की धूल से यात्रियों की परेशानी
याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोयले की डंपिंग और लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल स्टेशन परिसर के साथ आसपास के इलाकों तक पहुंचती है। यात्रियों का आरोप है कि प्लेटफार्म पर ट्रेन का इंतजार करते समय उन्हें धूल और प्रदूषण के बीच खड़ा होना पड़ता है।
विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को इससे अधिक परेशानी होने की बात कही गई है। स्थानीय ग्रामीण भी लंबे समय से कोल यार्ड से होने वाले प्रदूषण को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
पर्यावरणीय मानकों के पालन पर सवाल
याचिका में कोल यार्ड की गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के पालन पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर रेलवे अथवा संबंधित यार्ड संचालकों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। हाईकोर्ट द्वारा रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों से जानकारी मांगे जाने के बाद अब मामले में रेलवे का पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
20 अगस्त पर टिकी नजर
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड से जुड़े प्रदूषण का मामला अब न्यायिक निगरानी में पहुंच गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सुनवाई के दौरान वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो यात्रियों एवं ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
याचिकाकर्ता विनय जायसवाल, निवासी शिवगढ़, सरई, का कहना है कि वर्षों से चली आ रही समस्या को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। अब 20 अगस्त की सुनवाई में रेलवे की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।



