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ओ.बी.सी. वर्ग की ओर से बहस हुई आरम्भ, अगली सुनवाई 21 जूलाई दिन मंगलवार से होगी

ओ.बी.सी. वर्ग की ओर से बहस हुई आरम्भ, अगली सुनवाई 21 जूलाई दिन मंगलवार से होगी !

👉सरकार के पूर्व कोर्ट ने ओ.बी.सी. पक्ष को वहस सुनाने का दिया अवसर !

👉सरकार ने कोर्ट को नहीं बताया किस आधार पर आरक्षण का प्रतिशत किया है निर्धारित !

👉ओ.बी.सी. को संख्या के अनुपात मे आरक्षण नही देना है समानता का उल्लंघन : ओबीसी पक्ष !

👉सरकार ने नहीं बताया अनुपातिक प्रतिनिधित्व की परिभाषा !

👉 SC की आवादी 15.6% आरक्षण 16% एस.टी. की आवादी 21.1% आरक्षण 20% सामान्य वर्ग की कुल आवादी 13% आरक्षण 10% ओबीसी की आवादी 51% आरक्षण 14% को सरकार ने नहीं किया जास्टिफाई : ओबीसी अधिवक्ता का तर्क !

👉 कोर्ट को बताया सभी को सिर्फ ओबीसी के आरक्षण से आपत्ति क्यों ?

👉जबलपुर 23/7/2026:- ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों की सुनवाई का आज सातवा दिन था , आज हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष दोपहर 12 बजे से 1:30 बजे तक सुनवाई की गईं ! ओबीसी आरक्षण के विरूध दायर सभी मामलो मे सुनवाई समाप्त घोषित की गईं तथा 1 बजे ओबीसी आरक्षण के समर्थन सहित ओबीसी को 50% आरक्षण की मांग को लेकर दायर याचिका क्रमांक 8967/2024 की सुनवाई की गईं ! याचिका कर्त्ता एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस की ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश में सभी वर्गों को सिर्फ ओबीसी आरक्षण से ही तकलीफ है जबकि प्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 15.6% है जिससे 16 परसेंट आरक्षण दिया जा रहा है अनुसूचित जनजाति की संख्या 21.01% है जिसे 20% आरक्षण दिया जा रहा है, प्रदेश में सामान्य वर्ग की संख्या 13% है जिसे ईडब्ल्यूएस के नाम से 10% आरक्षण दिया जा रहा अर्थात मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी 51% है जिसे मात्र 14 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है जब सरकार ने इसे बढ़ाकर 27% किया तो सभी वर्गों को खासकर सवर्ण वर्ग द्वारा घोर आपत्ति उठाते हुई, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में सैकड़ो याचिकाए दाखिल कर दी गईं,जिसमे मध्य प्रदेश सरकार के जिम्मेदार अधिकारी वर्ग शामिल है!मध्य प्रदेश सरकार ने आज दिनांक तक कोर्ट को यह भी नहीं बताया गया है कि, ओबीसी सहित सभी वर्गों को आरक्षण का प्रतिशत किस आधार पर तथा किस फार्मले के अनुसार निर्धारित किया गया है! अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 15( 6)एवं 16(6 ) के तहत लागू किया गया है जिसमें स्पष्ट प्रावधान है कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का सभी वर्गों को लाभ दिया जाएगा लेकिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी नीति में स्पष्ट कर दिया गया है कि ईडब्ल्यूएस के प्रमाण पत्र सिर्फ सवर्ण वर्ग के गरीबो को ही दिए जाएंगे मध्य प्रदेश शासन का उपरोक्त कृत्य असंवैधानिक है, इतना ही नहीं ews आरक्षण स्पेशल आरक्षण है जिसे होरीजोंटल लागू किया जाना चाहिए था लेकिन इसे नियम विरूध रूप से वर्तिकल verical लागू किया है जिससे प्रत्येक वर्ग को निर्धारित आरक्षण मे 10% सीटों का नुकसान हो रहा है जो संविधान के अनुच्छेद 15(6) एवं 16 ( 6) के प्रावधानों के विपरीत भी है ! कोर्ट के समक्ष उपरोक्त तथ्य रखे गए प्रकरण की अगली सुनवाई मंगलवार को नियत की गई ! ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद साह, पुष्पेंद्र शाह, परमानंद साहू, उदय कुमार साहू, राम भजन लोदी अभिलाष लोधी, आर.ज़ी.वर्मा, राजमणि सिंगरौल कर रहे है !

अगली सुनवाई त्रुटि बस 21 जूलाई टाइप हो गया हैं कृपया इसे 28 जूलाई पड़ा जाए,जस्टिस सराफ उपलवध नहीं होने के कारण उक्त सभी प्रकरणों की अगली सुनवाई 28 जूलाई दिन मंगलवार को 2:30 बजे से होंगी !

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  • नंदकिशोर पटेल
    प्रधान संपादक एवं प्रकाशक
    भारत सरकार के नियमानुसार पंजीकृत समाचार पत्र के संपादक के रूप में निष्पक्ष, निर्भीक एवं जनहितकारी पत्रकारिता के लिए समर्पित। सत्य, पारदर्शिता और जनविश्वास हमारी पहचान है।

    सत्य • निष्पक्षता • जनहित

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