कोल वॉशरी की आड़ में काला खेल! करोड़ों के घोटाले की आशंका, बिजली उत्पादन पर भी असर

कोल वॉशरी की आड़ में काला खेल! करोड़ों के घोटाले की आशंका, बिजली उत्पादन पर भी असर
सिंगरौली। कोल वॉशरी की आड़ में कथित तौर पर चल रहे अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप हैं कि कोयले में भस्सी (निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री) की मिलावट कर बड़े पैमाने पर आर्थिक लाभ कमाया जा रहा है, जिससे न केवल पावर प्लांटों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा, उपभोक्ता हितों और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस कथित अवैध कारोबार से पावर प्लांटों को प्रतिवर्ष 50 से 70 करोड़ रुपये तक का नुकसान होने की आशंका है। वहीं बिजली उत्पादन की लागत बढ़ने के कारण सरकार को भी 200 से 300 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त सब्सिडी वहन करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोयले में निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री की मिलावट की जाती है, तो इससे बॉयलरों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बिजली उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बिजली आपूर्ति और उत्पादन लागत पर पड़ता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, निम्न गुणवत्ता वाले ईंधन के उपयोग से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता है, जिससे वायु गुणवत्ता और पर्यावरण संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यदि जांच में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि करोड़ों रुपये के घोटाले के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो रही है।
नोट: उपरोक्त जानकारी आरोपों और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होगी।



