बैढ़न बस स्टैंड पर बढ़ता यातायात दबाव, जाम से यात्री, व्यापारी और वाहन चालक बेहाल

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सिंगरौली संवाददाता
सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित अंतर्राज्यीय बस स्टैंड इन दिनों शहर की सबसे बड़ी यातायात समस्याओं में से एक बन गया है। बस स्टैंड के दोनों मुख्य प्रवेश द्वारों पर सुबह से देर शाम तक लगने वाला जाम यात्रियों, राहगीरों, व्यापारियों और वाहन चालकों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन चुका है। बढ़ते वाहनों का दबाव और अव्यवस्थित यातायात प्रबंधन अब इस बस स्टैंड की क्षमता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बस स्टैंड के दोनों गेटों के सामने ऑटो, ई-रिक्शा (टोटो) और अन्य छोटे यात्री वाहन सड़क पर ही खड़े होकर सवारियां भरते हैं। इसके कारण सड़क की उपयोगी चौड़ाई कम हो जाती है। जब एक साथ कई बसें बस स्टैंड में प्रवेश करती हैं या बाहर निकलती हैं, तो कुछ ही मिनटों में दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इस दौरान पैदल चलने वाले लोगों को भी सड़क पार करने में भारी कठिनाई होती है।
हर दिन जाम, हर दिन परेशानी
यात्रियों का कहना है कि कई बार उन्हें बस से उतरने के बाद सामान लेकर जाम के बीच से निकलना पड़ता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन लंबे समय तक फंसे रहते हैं, जिससे समय के साथ ईंधन की भी बर्बादी होती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी जाम के कारण निकलने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापार पर भी पड़ रहा असर
बस स्टैंड के आसपास कारोबार करने वाले व्यापारियों का कहना है कि लगातार लगने वाले जाम का असर उनके व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। कई ग्राहक जाम के कारण बाजार आने से बचते हैं, जबकि बाहर से आने वाले यात्रियों के सामने शहर की यातायात व्यवस्था की नकारात्मक छवि बनती है।
अभियान तो चलते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी है
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और यातायात पुलिस समय-समय पर अतिक्रमण हटाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अभियान चलाते हैं, लेकिन उनका असर कुछ दिनों तक ही दिखाई देता है। नियमित निगरानी और प्रभावी व्यवस्था के अभाव में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।
बढ़ते शहर के साथ नहीं बढ़ीं सुविधाएं
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब इस बस स्टैंड का निर्माण हुआ था, तब वाहनों की संख्या सीमित थी। लेकिन अब शहर के विस्तार के साथ बसों, ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। इसके बावजूद बस स्टैंड की संरचना और यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके कारण मौजूदा व्यवस्था बढ़ते दबाव को संभालने में सक्षम नहीं दिख रही है।
स्थायी समाधान की उठी मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने नगर निगम, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस से मांग की है कि बस स्टैंड परिसर में ऑटो और ई-रिक्शा के लिए अलग स्टैंड विकसित किया जाए, बसों के प्रवेश और निकास को व्यवस्थित किया जाए, पार्किंग की समुचित व्यवस्था बनाई जाए तथा व्यस्त समय में नियमित ट्रैफिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए अंतर्राज्यीय बस स्टैंड के विस्तार अथवा शहर के बाहरी क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए बस टर्मिनल के निर्माण पर भी गंभीरता से विचार करने की मांग की गई है।
जनहित का मुद्दा
बैढ़न अंतर्राज्यीय बस स्टैंड केवल परिवहन का केंद्र नहीं, बल्कि पूरे जिले की आवाजाही का प्रमुख द्वार है। ऐसे में यहां की यातायात व्यवस्था सुचारु होना हजारों यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस बढ़ती समस्या के समाधान के लिए केवल अस्थायी अभियान चलाता है या फिर कोई दीर्घकालिक और प्रभावी व्यवस्था भी लागू करता है।



