जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई से अधिवक्ताओं में चिंता, SCOARA ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCOARA) ने जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। एसोसिएशन ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगे हैं, तो उनकी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

SCOARA ने अपने बयान में कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकार है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति को बलपूर्वक दबाने के बजाय संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने मांग की है कि पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से संवाद और संयम के साथ व्यवहार किया जाए।

अपने बयान में SCOARA ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों—हिमत लाल शाह बनाम पुलिस आयुक्त, अहमदाबाद (1973) तथा रामलीला मैदान प्रकरण (2012)—का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस शक्तियों का प्रयोग केवल आवश्यकता, वैधता और अनुपातिकता के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप ही होना चाहिए।
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किसी भी लोकतंत्र की मजबूती विरोध की आवाज़ को दबाने में नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में उसकी रक्षा करने में होती है। यदि पुलिस बल प्रयोग के आरोप लगे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।



