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उन्नत खेती पर जिला प्रशासन का जोर, किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के निर्देश

कलेक्टर गौरव बैनल की अध्यक्षता में 'आत्मा' गवर्निंग बोर्ड एवं प्राकृतिक खेती समिति की संयुक्त बैठक

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सिंगरौली। जिले में कृषि को आधुनिक, लाभकारी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने नई पहल तेज कर दी है। कलेक्टर श्री गौरव बैनल की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में ‘आत्मा’ गवर्निंग बोर्ड एवं प्राकृतिक खेती जिला स्तरीय समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई, जिसमें किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों और शासन की योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुंचाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में कलेक्टर ने आत्मा योजना की समीक्षा करते हुए कृषि विभाग एवं कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले के किसानों के बीच आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देकर नई तकनीकों को खेतों तक पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।

कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के इच्छुक एवं प्रगतिशील किसानों का चयन कर उन्हें देश के अग्रणी कृषि संस्थानों और सफल कृषि क्षेत्रों का भ्रमण कराया जाए, ताकि वे आधुनिक खेती की तकनीकों को सीखकर जिले में भी लागू कर सकें।

उद्यानिकी क्षेत्र की समीक्षा के दौरान उन्होंने फूलों की खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले किसानों को शेड नेट और ड्रिप सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराया जाए।

मत्स्य पालन विभाग की समीक्षा में कलेक्टर ने जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए केज कल्चर एवं हैचरी निर्माण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने पात्र किसानों का चयन कर उन्हें शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने पर भी जोर दिया।

बैठक के अंत में कलेक्टर श्री बैनल ने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जगदीश गोमे, उप संचालक कृषि मनोज सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जय सिंह, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रिया कुशवाहा, ‘आत्मा’ के केशरी सूर्यवंशी, सहायक संचालक मत्स्य पालन मनोज अग्रवाल, वरिष्ठ उद्यान अधिकारी किशन सिंह, पशुपालन विभाग के डॉ. जितेंद्र, मार्कफेड के महेंद्र पाण्डेय सहित विभिन्न एफपीओ और किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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कृषि को आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाने के लिए केवल योजनाएं घोषित करना पर्याप्त नहीं है। जब तक आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक किसानों तक नहीं पहुंचेगा, तब तक अपेक्षित परिवर्तन संभव नहीं होगा। अब यह जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है कि बैठक के निर्देश कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि खेतों में दिखाई दें।

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