रजमिलान में हुनर की नई शुरुआत, पर क्या प्रदूषण से भी मिलेगी राहत?
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सिंगरौली। रजमिलान क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं एवं बालिकाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ निस्संदेह एक सकारात्मक और स्वागत योग्य पहल है। महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने वाले ऐसे प्रयास समाज में आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। किंतु इस पहल के साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी जुड़ा हुआ है—क्या केवल कौशल विकास से ही समग्र विकास संभव है, जबकि क्षेत्र के लोग लंबे समय से प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं?
रजमिलान एवं आसपास का क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। समय-समय पर क्षेत्र में संचालित उद्योगों पर उड़ती राख, धूल, वायु प्रदूषण तथा पर्यावरणीय मानकों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन परिस्थितियों में स्थानीय महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक उनके लिए स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करना भी है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की यह पहल तभी वास्तविक सफलता मानी जाएगी, जब इसके समानांतर पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर भी गंभीर एवं प्रभावी प्रयास दिखाई दें। यदि एक ओर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं और दूसरी ओर लोग प्रदूषित वातावरण में जीवन व्यतीत करने को विवश रहें, तो विकास की तस्वीर अधूरी ही प्रतीत होगी।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन Adani Foundation द्वारा किया जा रहा है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। साथ ही यह अपेक्षा भी स्वाभाविक है कि संस्था एवं संबंधित औद्योगिक समूह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का दायरा केवल कौशल विकास तक सीमित न रखें, बल्कि धूल एवं प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास, जल स्रोतों की सुरक्षा तथा स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य सुधार की दिशा में भी ठोस और पारदर्शी कदम उठाएं।
विकास का वास्तविक अर्थ केवल प्रशिक्षण केंद्रों का उद्घाटन नहीं, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में समग्र सुधार है।
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रजमिलान की महिलाओं को सिलाई मशीनें और रोजगार के अवसर अवश्य मिलें, लेकिन उनके हिस्से में स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और स्वस्थ जीवन भी आए। उद्योगों की सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय जवाबदेही साथ-साथ निभे, तभी विकास का उद्देश्य पूर्ण माना जाएगा।



