राज्यसभा में शिक्षा और मनुस्मृति को लेकर तीखी बहस, खरगे के बयान पर सत्ता पक्ष का हंगामा

राज्यसभा में शिक्षा और मनुस्मृति को लेकर तीखी बहस, खरगे के बयान पर सत्ता पक्ष का हंगामा
नई दिल्ली। राज्यसभा में शिक्षा व्यवस्था, विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम और मनुस्मृति को लेकर गुरुवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर शिक्षा के निजीकरण और शैक्षणिक संस्थानों में वैचारिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया, जिसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
खरगे ने कहा कि शिक्षा किसी वर्ग विशेष का अधिकार नहीं होनी चाहिए, लेकिन आज की स्थिति ऐसी है कि शैक्षणिक संस्थानों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6 प्रतिशत खर्च किया जाना चाहिए, जबकि वर्तमान में लगभग 3 प्रतिशत ही खर्च किया जा रहा है। उनका आरोप था कि इसके कारण सरकारी शिक्षा कमजोर हो रही है और निजीकरण बढ़ने से दलित, आदिवासी, पिछड़े वर्ग तथा गरीब परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
खरगे ने आगे कहा कि सरकार विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक और कुलपति लाने की बात करती है, लेकिन पाठ्यक्रम में ऐसे विषय शामिल किए जा रहे हैं जिन पर आपत्ति है। उन्होंने मनुस्मृति से जुड़े कुछ कथनों का हिंदी अनुवाद पढ़ते हुए दावा किया कि इस प्रकार की सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “ये आरएसएस का सिलेबस है। ऐसे विचारों की मैं निंदा करता हूं और ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों में आरएसएस के लोगों को भरा जा रहा है।”
खरगे के इस बयान के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। सदन के नेता एवं केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता का बयान तथ्यों से परे है और इससे समाज में अशांति फैल सकती है। उन्होंने मांग की कि खरगे अपने दावों के समर्थन में मनुस्मृति की मूल प्रति प्रस्तुत करें।
हंगामे के बीच सभापति ने खरगे से कहा कि वे अपने उद्धरणों को प्रमाणित करें। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि मनुस्मृति से संबंधित जो बातें सदन में कही गई हैं, उन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।
सदन में इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।



