मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरोध में 7 जुलाई को वैचारिक बहिष्कार का ऐलान

मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरोध में 7 जुलाई को वैचारिक बहिष्कार का ऐलान
अपना विचार समाचार रीवा। सरदार पटेल संस्थान रीवा, पटेल समाज तथा ग्राम देवास (रीवा) के कुछ जागरूक नागरिकों ने मृत्युभोज (ब्राह्मण भोज) जैसी सामाजिक परंपराओं को सामाजिक कुरीति बताते हुए इनके विरोध में जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
जारी अपील में कहा गया है कि समाज का नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों का बहिष्कार किया जाना चाहिए। आयोजकों का मानना है कि मृत्युभोज जैसी परंपराओं के कारण कई परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है तथा सामाजिक दबाव भी बढ़ता है। उनका कहना है कि ऐसे खर्चों के स्थान पर शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजहित के कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसी उद्देश्य से 7 जुलाई को पूर्व ओबीसी आयोग के अध्यक्ष एवं विधायक **** के यहां आयोजित बताए जा रहे मृत्युभोज (ब्राह्मण भोज) का शांतिपूर्ण एवं वैचारिक बहिष्कार करने की घोषणा की गई है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समाज या समुदाय का विरोध नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार के लिए जनजागरूकता फैलाना है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सामाजिक कुरीतियों से मुक्त होकर शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज के विकास को प्राथमिकता दें।
नोट: यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा जारी सार्वजनिक अपील पर आधारित है। यदि इस विषय पर विधायक या अन्य संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होता है, तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।



