560 दिन बाद निलंबन: शिक्षा विभाग की सुस्ती पर उठे बड़े सवाल
जेल पहुंचने के डेढ़ साल बाद हुई कार्रवाई, जिम्मेदारों की भूमिका जांच के घेरे में
अपना विचार समाचार
सिंगरौली। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बैढ़न के तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रामदास साकेत को न्यायालय द्वारा दोषसिद्ध किए जाने और जेल भेजे जाने के लगभग 560 दिन बाद आखिरकार निलंबित कर दिया गया। इस असामान्य देरी ने विभागीय जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्ध होने के बाद संबंधित अधिकारी को जेल भेजा गया था। सामान्यतः किसी शासकीय कर्मचारी के 48 घंटे से अधिक जेल में रहने पर तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में विभाग लंबे समय तक मौन बना रहा।
फाइलों में दबा रहा मामला?
सूत्रों के अनुसार, जिला स्तर से संबंधित प्रतिवेदन समय पर भोपाल भेज दिया गया था, लेकिन संचालनालय स्तर पर लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। सवाल यह है कि यदि दस्तावेज समय पर पहुंच चुके थे, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
जवाबदेही तय करने की मांग
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का कहना है कि केवल निलंबन ही पर्याप्त नहीं है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से मामला महीनों तक फाइलों में दबा रहा, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। यदि समय पर कार्रवाई होती, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर इतने गंभीर सवाल नहीं उठते।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या शासन केवल निलंबन तक सीमित रहेगा या फिर कार्रवाई में हुई देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।



