मोरवा विस्थापन को लेकर केंद्र स्तर पर मंथन, कलेक्टर के ‘पक्का मकान’ मॉडल को मिली प्राथमिक सहमति

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सिंगरौली । मोरवा विस्थापन को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से गुरुवार को कोयला मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में जिला प्रशासन और एनसीएल प्रबंधन के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीति, विस्थापन की कार्ययोजना तथा विस्थापित परिवारों के हितों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में एनसीएल प्रबंधन ने मोरवा विस्थापन के लिए तैयार की गई पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध ढंग से पूरा करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इस दौरान कलेक्टर श्री गौरव बैनल ने विस्थापित परिवारों के हित में महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए कहा कि केवल आर्थिक मुआवजा देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इच्छुक विस्थापितों को एक सुव्यवस्थित आवासीय कॉलोनी में सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराने का विकल्प भी दिया जाए।
कलेक्टर ने बताया कि एनसीएल और हाउसिंग एजेंसियों के सहयोग से चरणबद्ध तरीके से आधुनिक कॉलोनी विकसित की जा सकती है, जिसमें पक्की सड़कें, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, पेयजल व्यवस्था, ओवरहेड टैंक, सीवरेज नेटवर्क सहित सभी आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हों। उनका कहना था कि इस मॉडल से विस्थापित परिवारों को बेहतर जीवन स्तर मिलेगा और भविष्य में अवैध कॉलोनियों व अतिक्रमण जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
कलेक्टर के सुझाव को गंभीरता से लेते हुए कोयला मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी ने जिला प्रशासन, एनसीएल प्रबंधन और हाउसिंग बोर्ड को संयुक्त बैठक आयोजित कर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने हाउसिंग बोर्ड भोपाल की चेयरपर्सन से भी शीघ्र चर्चा कर इस योजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि मोरवा विस्थापन को एक आदर्श पुनर्वास मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।
बैठक में जिला खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल सहित एनसीएल के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।



