15 लाख करोड़ हैं, लेकिन खर्च नहीं हो रहे!
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, मेरे पास 15 लाख करोड़ रुपये हैं, लेकिन मैं इन्हें खर्च नहीं कर पा रहा।

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“मेरे पास 15 लाख करोड़ रुपये हैं, लेकिन मैं इन्हें खर्च नहीं कर पा रहा।” केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान सुनकर आम आदमी कुछ पल के लिए जरूर सोच में पड़ गया होगा कि काश उसकी जेब में भी ऐसी “समस्या” होती।
देश का आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी, टूटी सड़कों और रोजमर्रा के खर्चों से जूझ रहा है, जबकि सरकार के पास विकास के लिए हजारों-लाखों करोड़ रुपये होने के बावजूद कई परियोजनाएं वर्षों तक फाइलों में अटकी रहती हैं। सवाल यह नहीं कि पैसा है या नहीं, सवाल यह है कि जहां जरूरत है, वहां विकास की रफ्तार क्यों नहीं पहुंच पाती?

अगर वास्तव में विकास के लिए धन उपलब्ध है, तो देश के अनेक ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कें, अधूरे पुल और वर्षों से लंबित परियोजनाएं आखिर किसका इंतजार कर रही हैं? जनता की नजर में विकास का पैमाना भाषण नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला काम है।



