गोढ़वार गौशाला पर उठे सवालों के बीच प्रशासन का स्पष्टीकरण: जांच में सभी 108 गौवंश स्वस्थ मिले, व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप होने का दावा

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सिंगरौली। जिले के चितरंगी विकासखंड की ग्राम पंचायत गोढ़वार गौशाला को लेकर हाल ही में विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित खबरों के बाद पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग का कहना है कि गौशाला में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या गौवंशों की असामान्य मृत्यु की पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय जांच में गौशाला में मौजूद सभी 108 गौवंश पूरी तरह स्वस्थ पाए गए हैं।
तीन सदस्यीय चिकित्सकीय दल ने किया दो दिन तक निरीक्षण
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक ने बताया कि समाचारों में प्रकाशित तथ्यों की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय पशु चिकित्सा दल गठित किया गया। इस दल में डॉ. जीतेंद्र कुमार प्रजापति, डॉ. अनामिका विश्वकर्मा और डॉ. अंकिता मिश्रा शामिल थीं।
दल ने 14 और 15 जुलाई 2026 को गौशाला का विस्तृत निरीक्षण कर भौतिक सत्यापन किया तथा वहां मौजूद गौवंशों के स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं का आकलन किया।
सभी गौवंश स्वस्थ, चारे और पानी की पर्याप्त व्यवस्था
जांच दल के अनुसार गौशाला में मौजूद सभी 108 गौवंश स्वस्थ पाए गए। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पशुओं का नियमित टीकाकरण (Vaccination) और डिवर्मिंग (कृमिनाशक उपचार) किया जा रहा है।
गौशाला में पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता का सूखा भूसा उपलब्ध है। वहीं हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दो चरवाहों की तैनाती की गई है, जो प्रतिदिन पशुओं को समीपस्थ चारागाह में चराने ले जाते हैं।
निरीक्षण के दौरान स्वच्छ पेयजल, गोबर एवं गौमूत्र के प्रबंधन तथा अपशिष्ट निस्तारण की व्यवस्था भी संतोषजनक पाई गई।
तीन माह में अप्राकृतिक मृत्यु का कोई मामला नहीं
विभागीय जांच प्रतिवेदन में यह भी कहा गया है कि पिछले तीन महीनों में गौशाला में किसी भी गौवंश की बीमारी या दुर्घटना के कारण अप्राकृतिक मृत्यु नहीं हुई है।
यदि किसी पशु की प्राकृतिक मृत्यु होती है, तो पशु चिकित्सक द्वारा परीक्षण के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार उसका सम्मानजनक अंतिम निस्तारण किया जाता है।
मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड के मानकों के अनुरूप संचालन का दावा
पशुपालन विभाग ने कहा है कि गोढ़वार गौशाला का संचालन मध्यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड, भोपाल के दिशा-निर्देशों एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा है तथा गौवंशों की देखभाल पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित की जा रही है।
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गोढ़वार गौशाला को लेकर उठे सवालों के बाद प्रशासन द्वारा जांच कराना एक आवश्यक कदम था। विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में सभी व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताया है, लेकिन जनविश्वास बनाए रखने के लिए केवल विभागीय स्पष्टीकरण ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यदि भविष्य में भी समय-समय पर स्वतंत्र निरीक्षण, सार्वजनिक रिपोर्ट और पारदर्शी निगरानी की व्यवस्था हो, तो गौशालाओं के संचालन को लेकर उठने वाले संदेह स्वतः समाप्त होंगे। पशुओं की सुरक्षा और देखभाल केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी भी है।



