मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ का पांचवां राज्य अधिवेशन उमरिया में सफलतापूर्वक संपन्न*

*मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ का पांचवां राज्य अधिवेशन उमरिया में सफलतापूर्वक संपन्न*
अपना विचार उमरिया 23/8/2026
-मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ, मध्य प्रदेश का पांचवां राज्य अधिवेशन जिला उमरिया में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अधिवेशन की शुरुआत संगठन के ध्वजारोहण और राष्ट्रगीत के साथ हुई, ध्वजारोहण मू गुलाब प्रजापति प्रदेश अध्यक्ष मक्कम के द्वारा किया गया एवं संविधान के उद्देशिका का वाचन तथा शपथ मू सुरेश द्रविड़ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बामसेफ व मू सूरजपाल सिंह राष्ट्रीय कार्यालय सचिव मक्कम अतिथियों द्वारा दिलाई गई। इसके बाद कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से आए कर्मचारी प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने भाग लिया।
प्रथम सत्र उद्घाटन सह प्रबोधन का विषय “प्रशिक्षित वैचारिक अनुशासित एवं सन्वैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध कर्मचारी नेतृत्व का निर्माण—चुनौतियां एवं समाधान” रहा। कार्यक्रम का उद्घाटन एवं प्रबोधन मू अरुण कुमार पटेल प्राचार्य ने की, सत्र के मुख्य अतिथि मू सुरेश द्रविण, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, BAMCEF, नई दिल्ली रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मू जितेंद्र सूर्यवंशी प्रदेश प्रभारी मक्कम ने की, जबकि मू सूरजपाल सिंह राष्ट्रीय कार्यालय सचिव मक्कम दिल्ली, एड आरएस वर्मा प्रदेश प्रशिक्षण सचिव मूलनिवासी संघ म प्र, मू चंदा कबीर राज्य कोषाध्यक्ष मक्कम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सत्र की प्रस्तावना मू तेजप्रताप प्रजापति राज्य संगठन सचिव मक्कम ने रखी तथा संचालन मू महिपाल सिंह राज्य महासचिव मक्कम ने किया।
प्रथम सत्र में वक्ताओं ने कर्मचारी नेतृत्व को वैचारिक रूप से प्रशिक्षित करने, अनुशासित रहने, संगठन को मजबूत बनाने तथा वर्तमान सामाजिक एवं प्रशासनिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए संगठित एवं प्रतिबद्ध नेतृत्व की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

भोजन अवकाश के पश्चात द्वितीय सत्र (प्रतिनिधि सत्र )आयोजित किया गया। विषय “सार्वजनिक क्षेत्रों में तीव्र गति से निजीकरण -कल्याणकारी राज्य की संकल्पना की अवहेलना” रहा। इस सत्र के मुख्य अतिथि मू कमलेश कबीर राष्ट्रीय महासचिव मक्कम रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मू गुलाब प्रजापति प्रदेश अध्यक्ष मक्कम म प्र ने की।द्वितीय सत्र में विभिन्न वक्ताओं ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीव्र गति से निजीकरण के दुष्परिणाम, कर्मचारी हितों, सामाजिक न्याय तथा कल्याणकारी राज्य की अवधारणा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों की भूमिका समाज के व्यापक हितों से जुड़ी है और कर्मचारियों एवं आम जनता के हितों की रक्षा के लिए जागरूक एवं संगठित प्रयास आवश्यक हैं। वक्तागण में मू रावेन्द्र बौद्ध, मू डॉ. अनिल प्रजापति, संविधान प्रबोधक, ने कहा कि बाबा साहब पिछड़ो वर्गों को एक करना चाहते थे, बाबा साहब डॉ अंबेडकर का मानना था कि संविधान में दिए गए अधिकार यदि पिछड़े वर्ग हासिल करना चाहते हैं तो पिछड़े वर्ग के लोगों को एक पहचान के साथ एक मंच पर आना होगा तभी राष्ट्रीयकरण का पैग़ाम और निजीकरण पर लगाम होगा, जातीय संगठन को बनाना और मजबूत करना, या उन्हें पालना ही निजीकरण है यही ठेकेदारी प्रथा है जहाँ पर कोई एक व्यक्ति मजबूत होता है बाकी समाज पीछे रह जाता है, यही से व्यक्तिवाद पनपता है फिर सुप्रीमो बनकर बैठ जाता है हर निर्णय अकेले लेता है यही है राजतंत्र। बाबा साहब ने कहा था कि जाति पर गर्व करना तुम्हारे विनास का कारण होगा। मूलनिवासी कर्मचारी कल्याण महासंघ पिछड़े वर्ग (एसटी एससी ओबीसी )एवं माइनॉरिटी के कर्मचारियों को इकट्ठा कर वैचारिक प्रशिक्षित अनुशासित करके राष्ट्रीयकरण का पैग़ाम हासिल करना चाहती है और इसी से देश के समस्त मूलनिवासी कर्मचारियों का कल्याण निहित है। मू डॉ. तरुण कुमार सिंह राज्य उपाध्यक्ष मक्कम ने प्रस्तावना प्रस्तुत की तथा संचालन मू हीरालाल बुनकर राज्य कार्यकारिणी सदस्य मक्कम ने किया।
अधिवेशन के समापन अवसर पर मू धर्मेंद्र कुमार पटेल, जिला अध्यक्ष मक्कम उमरिया ने सभी अतिथियों, पदाधिकारियों, कर्मचारी साथियों एवं उपस्थित प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पांचवें राज्य अधिवेशन के सफल आयोजन से संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। अधिवेशन में कर्मचारी हितों, वैचारिक प्रशिक्षण, संगठनात्मक मजबूती तथा सार्वजनिक क्षेत्र के संरक्षण के लिए निरंतर सक्रियता के संकल्प को दोहराया गया।



