
उपनाम छोड़ो, पटेल नाम जोड़ो का संदेश आज भी प्रासंगिक
सामाजिक क्रांति के अग्रदूत डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि, सामाजिक न्याय के संघर्ष को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प
अपना विचार सिंगरौली।
सामाजिक न्याय, समानता और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की बुलंद आवाज़ रहे 21वीं सदी के महानायक डॉ. सोनेलाल पटेल की जयंती पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया। विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सोनेलाल पटेल ने अपना संपूर्ण जीवन किसानों, पिछड़े वर्गों, वंचित समाज और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित किया। उन्होंने सामाजिक समरसता, आत्मसम्मान और समान भागीदारी पर आधारित समाज की परिकल्पना को जन-जन तक पहुंचाया।
कार्यक्रम में उनके प्रसिद्ध नारे “उपनाम छोड़ो, पटेल नाम जोड़ो” तथा “सोना बेचो, लोहा खरीदो” का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये केवल नारे नहीं, बल्कि समाज को संगठित करने, आत्मसम्मान जगाने और संघर्ष के लिए प्रेरित करने वाले विचार हैं। वक्ताओं ने कहा कि आज भी सामाजिक न्याय और समान अवसर की स्थापना के लिए डॉ. सोनेलाल पटेल के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं।
जयंती समारोह में उपस्थित लोगों ने कहा कि सामाजिक विषमता, भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के साथ संघर्ष करना ही डॉ. सोनेलाल पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। युवाओं से शिक्षा, संगठन और सामाजिक चेतना के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने का आह्वान भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने डॉ. सोनेलाल पटेल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने और सामाजिक न्याय पर आधारित समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लिया।बॉक्स समाचार
“उपनाम छोड़ो, पटेल नाम जोड़ो”
“सोना बेचो, लोहा खरीदो”
ये दोनों संदेश डॉ. सोनेलाल पटेल के सामाजिक जागरण, आत्मसम्मान, संगठन और संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं तथा आज भी समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।



