नन्द किशोर बौद्ध : संघर्ष, सामाजिक चेतना और विचारों की यात्रा

नन्द किशोर बौद्ध : संघर्ष, सामाजिक चेतना और विचारों की यात्रा
जन्म : 04 सितंबर 1983
सिंगरौली की धरती पर 04 सितंबर 1983 को एक साधारण गरीब किसान परिवार में जन्मे नन्द किशोर बौद्ध का जीवन संघर्ष, अध्ययन, सामाजिक चेतना और परिवर्तन की निरंतर यात्रा का परिचायक है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े नन्द किशोर ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें अपने जीवन की दिशा और संघर्ष की प्रेरणा बनाया।
बचपन से ही ग्रामीण समाज में दिखाई देने वाली सामाजिक असमानता, भेदभाव और गैरबराबरी की घटनाओं ने उनके मन पर गहरा प्रभाव डाला। स्कूली जीवन में ही उनके भीतर यह सवाल पैदा होने लगा कि समाज में मनुष्य-मनुष्य के बीच इतनी असमानता क्यों है? इसी जिज्ञासा ने आगे चलकर उन्हें सामाजिक परिवर्तन के विचारों से जोड़ दिया।
शिक्षा से विचार और विचार से संघर्ष तक
नन्द किशोर बौद्ध ने अपनी माध्यमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, खुटार से तथा उच्चतर माध्यमिक शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खुटार से पूरी की।
इसके बाद उन्होंने शासकीय महाविद्यालय वैढ़न, सिंगरौली से बी.ए. की शिक्षा प्राप्त की। सामाजिक और कानूनी विषयों में रुचि के कारण उन्होंने आगे कानून की पढ़ाई की और संजय गांधी स्मृति स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीधी से एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की।
कानून की शिक्षा ने उनके भीतर न्याय, अधिकार और संवैधानिक मूल्यों की समझ को और मजबूत किया। वर्ष 2009 से जिला एवं सत्र न्यायालय, वैढ़न, सिंगरौली में अधिवक्ता के रूप में नियमित विधि व्यवसाय करते हुए वे न्यायिक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
उनके लिए वकालत केवल आजीविका का माध्यम नहीं रही, बल्कि कानून और संविधान के माध्यम से वंचित और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों की समझ विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनी।
विचारों ने दिखाई सामाजिक आंदोलन की राह
नन्द किशोर बौद्ध के सामाजिक जीवन को दिशा देने में दो प्रमुख प्रेरणास्रोत रहे—माननीय भीम सिंह पटेल, पूर्व सांसद रीवा के विचार और मान्यवर कांशीराम साहब का सामाजिक परिवर्तन का चिंतन।
इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक पुरखों के साहित्य का अध्ययन किया। पुस्तकों, विचारों और सामाजिक घटनाओं ने उनके भीतर सामाजिक परिवर्तन की चेतना को मजबूत किया।
धीरे-धीरे यह विचार उनके जीवन का हिस्सा बन गया कि समाज में व्याप्त गैरबराबरी, जातिभेद और सामाजिक अन्याय को केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि संगठित सामाजिक प्रयासों के माध्यम से चुनौती दी जानी चाहिए।
मूलनिवासी संघ से सक्रिय सामाजिक भूमिका
वर्ष 2011 में नन्द किशोर बौद्ध सक्रिय रूप से मूलनिवासी संघ से जुड़े। संगठन में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और विचारधारा के प्रति समर्पित रहते हुए संगठनात्मक कार्यों में योगदान दिया।
उन्होंने संगठन में—
– जिला अध्यक्ष,
– राज्य कार्यकारिणी सदस्य,
– राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तथा
– राष्ट्रीय मीडिया सचिव
जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया।
इन जिम्मेदारियों ने उन्हें समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों में काम करने का अवसर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उनका मूल उद्देश्य रहा है कि समाज से गैरबराबरी और जातिभेद समाप्त हो तथा समता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित समाज का निर्माण हो।
उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था और मानसिकता के विरुद्ध है जो मनुष्य को जन्म के आधार पर छोटा-बड़ा मानती है।
राजनीतिक भागीदारी और लोकतांत्रिक संघर्ष
सामाजिक परिवर्तन के साथ राजनीतिक सत्ता और व्यवस्था की भूमिका को भी उन्होंने महत्वपूर्ण माना। इसी सोच के साथ पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) के राजनीतिक मंच से जुड़कर उन्होंने वर्ष 2018 में विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 80, सिंगरौली, मध्यप्रदेश से चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष किया।
उनकी राजनीतिक यात्रा का उद्देश्य व्यक्तिगत पद या प्रतिष्ठा से अधिक सामाजिक मुद्दों को लोकतांत्रिक मंच पर उठाना और वंचित समाज की आवाज को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाना रहा।
कोरोना काल में डिजिटल माध्यम को बनाया जनजागरूकता का हथियार
कोरोना महामारी का दौर पूरी दुनिया के लिए कठिन समय था। उस समय जब लोगों के बीच सही और उपयोगी जानकारी पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी, नन्द किशोर बौद्ध ने सोशल मीडिया को जनजागरूकता का माध्यम बनाया।
उन्होंने *अपना विचार* फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल स्थापित किए तथा लगातार लाइव डिबेट, चर्चाओं और लोगों के विचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किया।
इस दौर ने उनके जीवन में एक नई भूमिका जोड़ी—डिजिटल माध्यम के जरिए समाज और जनता से संवाद करने की भूमिका।
बौद्ध धम्म की ओर जीवन का महत्वपूर्ण मोड़
नन्द किशोर बौद्ध के जीवन में 14 अक्टूबर 2022 एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण दिन रहा। उन्होंने बिना किसी दबाव के, अपनी स्वतंत्र इच्छा से बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की।
बौद्ध धम्म से जुड़ना उनके लिए केवल धार्मिक परिवर्तन नहीं, बल्कि उनके सामाजिक और वैचारिक जीवन की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समता, करुणा, प्रज्ञा, बंधुत्व और मानवतावाद जैसे मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को इससे नई दिशा मिली।
इसी के बाद उनके नाम के साथ “बौद्ध” उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
‘अपना विचार’ : विचार से पत्रकारिता तक
सामाजिक सरोकारों और जनजागरूकता के अपने लंबे अनुभव को आगे बढ़ाते हुए नन्द किशोर बौद्ध ने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम बढ़ाया।
11 मई 2026 को अपना विचार साप्ताहिक समाचार पत्र का भारत सरकार से पंजीयन प्राप्त हुआ। सिंगरौली, मध्यप्रदेश से प्रकाशित होने वाले इस समाचार पत्र के वे सम्पादक, मालिक और प्रकाशक हैं।
अपना विचार उनके लिए केवल एक समाचार पत्र नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे सामाजिक और वैचारिक संघर्ष का एक नया माध्यम है।
पत्रकारिता के माध्यम से उनका प्रयास है कि स्थानीय समस्याओं, सामाजिक सरोकारों, जनहित के मुद्दों और आम आदमी की आवाज को प्रमुखता मिले तथा पत्रकारिता सत्य, निर्भीक और निष्पक्ष रूप में समाज के सामने अपनी भूमिका निभाए।
एक यात्रा जो अभी जारी है
नन्द किशोर बौद्ध की जीवन यात्रा को यदि कुछ शब्दों में समझना हो तो इसे गरीब किसान परिवार से निकले एक ग्रामीण युवक की शिक्षा, कानून, सामाजिक आंदोलन, राजनीति, डिजिटल जनजागरूकता, बौद्ध धम्म और पत्रकारिता तक की यात्रा कहा जा सकता है।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति अध्ययन, विचार और संघर्ष को अपना साथी बना ले तो वह अपने जीवन को एक बड़े सामाजिक उद्देश्य से जोड़ सकता है।
वकालत ने उन्हें कानून और न्याय की समझ दी, सामाजिक आंदोलन ने उन्हें परिवर्तन का रास्ता दिखाया, राजनीति ने लोकतांत्रिक संघर्ष का अनुभव दिया, बौद्ध धम्म ने समता और मानवतावादी दृष्टि को मजबूती दी और पत्रकारिता ने जनता की आवाज को व्यापक मंच देने का अवसर दिया।
आज भी उनका संघर्ष जारी है—जाति और गैरबराबरी के विरुद्ध, सामाजिक न्याय के पक्ष में, समता और बंधुत्व के लिए तथा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए।
उनकी कहानी किसी एक व्यक्ति की कहानी मात्र नहीं है। यह उस ग्रामीण भारत की कहानी है, जहां सीमित संसाधनों के बीच जन्मा एक व्यक्ति शिक्षा, विचार और संघर्ष के सहारे अपनी पहचान बनाता है और फिर अपने जीवन को समाज के व्यापक हित से जोड़ देता है।
**“संघर्ष से विचार पैदा होते हैं,
विचार से चेतना पैदा होती है,
और चेतना से परिवर्तन की राह निकलती है।”**
नन्द किशोर बौद्ध की जीवन-यात्रा इसी विचार और संघर्ष की निरंतर यात्रा है।
व्यक्तिगत परिचय एवं संपर्क
नाम: नन्द किशोर बौद्ध
जन्म दिनांक: 04 सितंबर 1983
निवास: ग्राम गहिलरा, पोस्ट खुटार, ब्लाक वैढ़न, जिला सिंगरौली, मध्यप्रदेश – 486886
व्यवसाय: अधिवक्ता, जिला एवं सत्र न्यायालय, वैढ़न, सिंगरौली
सामाजिक भूमिका: सामाजिक कार्यकर्ता
पत्रकारिता: सम्पादक, मालिक एवं प्रकाशक – अपना विचार साप्ताहिक समाचार पत्र
मोबाइल: 9826043633



