वनाधिकार के सामुदायिक दावों के निराकरण में आएगी तेजी : कमिश्नर बीएस जामोद

वनाधिकार के सामुदायिक दावों के निराकरण में आएगी तेजी : कमिश्नर बीएस जामोद
सिंगरौली, 10 जून 2026। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा कमिश्नर कार्यालय सभागार में वनाधिकार अधिनियम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने कहा कि वनाधिकार अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में व्यक्तिगत दावों को मान्यता दी जा चुकी है तथा अब सामुदायिक वनाधिकार दावों के निराकरण की प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक वनाधिकार केवल वनों के उपयोग का अधिकार ही नहीं देते, बल्कि इनके संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी समुदायों को सौंपते हैं। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों की शंकाओं का समाधान होने से सामुदायिक दावों के निस्तारण का मार्ग और स्पष्ट हुआ है।
कार्यशाला में बेंगलुरु से आए मास्टर ट्रेनर एवं विषय विशेषज्ञ शरद लेले ने बताया कि वनाधिकार अधिनियम पारंपरिक वनवासियों को उनके ऐतिहासिक अधिकार वापस प्रदान करता है। सामुदायिक दावों के अंतर्गत पूजा स्थलों तक पारंपरिक मार्ग से पहुंच, जलाशयों में मत्स्याखेट, वनोपज संग्रहण तथा वन क्षेत्र में आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण जैसे अधिकार शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, संरक्षित वन क्षेत्र एवं वन ग्रामों में भी अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं। सामुदायिक दावों की प्रक्रिया ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति से शुरू होकर खंड स्तरीय समिति और अंततः जिला स्तरीय समिति तक पहुंचती है, जहां अंतिम निर्णय लिया जाता है।
कार्यशाला में वन संरक्षण, राजस्व एवं वनभूमि सीमांकन, वनकर्मियों के प्रशिक्षण तथा सामुदायिक दावों के निराकरण संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस अवसर पर कलेक्टर गौरव बैनल, जिला पंचायत सीईओ जगदीश गोमे, एसडीएम सिंगरौली सुरेश जाधव, एसडीएम चितरंगी देवेंद्र द्विवेदी, एसडीएम माड़ा नंदन तिवारी, एसडीओ वन विभाग एन.के. त्रिपाठी, डिप्टी कलेक्टर माइकेल तिर्की, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य मिथिलेश इवने सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।



