शपथ में मनमानी नहीं चलेगी: केरल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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सिंगरौली/तिरुवनंतपुरम। लोकतंत्र में शपथ केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि संविधान और कानून के प्रति सार्वजनिक प्रतिबद्धता होती है। इसी सिद्धांत को दोहराते हुए Kerala High Court ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि शपथ लेते समय कानून में निर्धारित शब्दों से बाहर नहीं जा सकते।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि या तो “ईश्वर के नाम पर” शपथ ले सकते हैं या बिना ईश्वर का नाम लिए सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा (Solemn Affirmation) कर सकते हैं।
लेकिन शपथ में अपनी ओर से भारत माता, किसी देवी-देवता, किसी संगठन, राजनीतिक शहीद या अन्य व्यक्ति का नाम जोड़ना कानून के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ पार्षदों की शपथ को अवैध घोषित करते हुए उन्हें दोबारा विधिसम्मत शपथ लेने का निर्देश दिया गया।
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यह फैसला किसी धर्म, देवी-देवता या भारत माता के सम्मान के खिलाफ नहीं है। अदालत का उद्देश्य केवल इतना है कि शपथ वही होगी, जो कानून ने तय की है। यदि हर व्यक्ति अपनी पसंद के शब्द जोड़ने लगे, तो शपथ का निर्धारित स्वरूप और उसकी कानूनी वैधता दोनों प्रभावित होंगी।
लोकतंत्र में संविधान सर्वोपरि है। जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत आस्था का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक पद की शपथ कानून के दायरे में ही होनी चाहिए। यही संवैधानिक व्यवस्था और विधि के शासन की मूल भावना है।
स्रोत: The Times of India, India Today, ThePrint और The News Minute (केरल हाई कोर्ट के फैसले पर प्रकाशित रिपोर्टें)।



