स्थगन आदेश को ठेंगा! कोर्ट के आदेश के बावजूद बिलौंजी कॉलेज चौक पर जारी निर्माण, प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर सवाल

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सिंगरौली। न्यायालय के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद बिलौंजी कॉलेज चौक स्थित विवादित भूमि पर निर्माण कार्य जारी रहने का मामला अब कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों में आशंका है कि यदि समय रहते प्रशासन और पुलिस ने हस्तक्षेप नहीं किया तो यह भूमि विवाद कभी भी बड़े टकराव का रूप ले सकता है।

चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश, वरिष्ठ खंड, सिंगरौली द्वारा 03 जुलाई 2026 को पारित आदेश में स्पष्ट रूप से प्रतिवादियों को सर्वे क्रमांक 347/1/2, रकबा 0.016 हेक्टेयर की विवादित भूमि का विक्रय, हस्तांतरण तथा किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से रोक दिया गया है। न्यायालय ने यह आदेश एक वर्ष अथवा वाद के अंतिम निराकरण तक प्रभावी रहने की बात कही है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि न्यायालय का आदेश लागू है, तो फिर निर्माण कार्य किसके संरक्षण में जारी है?
क्या संबंधित विभागों को न्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर उसे नजरअंदाज किया जा रहा है? यदि ऐसा है तो यह केवल न्यायालय की अवमानना का विषय नहीं, बल्कि कानून के शासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विवादित स्थल पर लगातार निर्माण होने से तनाव बढ़ रहा है और कभी भी दो पक्ष आमने-सामने आ सकते हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी—प्रशासन की, पुलिस की या उन लोगों की जो न्यायालय के आदेश को चुनौती देने का साहस कर रहे हैं?
अब उठ रहे हैं बड़े सवाल…
क्या न्यायालय के आदेश का पालन कराना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
यदि निर्माण जारी है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या कानून केवल आम नागरिकों के लिए है, प्रभावशाली लोगों के लिए नहीं?
यदि विवाद बढ़ा तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
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प्रशासन और सिंगरौली पुलिस से मांग करता है कि न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए, निर्माण कार्य रोका जाए तथा आदेश की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि जिले में कानून के राज पर जनता का विश्वास बना रहे।
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“सवाल सत्ता से… जवाब जनता के लिए।”



