धान के बीज पर संकट: किसानों की चिंता बढ़ी, अधिकारियों के विरोधाभासी बयानों ने खड़े किए सवाल

अपना विचार समाचार
सिंगरौली। खरीफ सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन सिंगरौली में धान के सरकारी बीज की उपलब्धता को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। खेतों में बोवनी का समय निकलता जा रहा है, वहीं हजारों किसान सरकारी बीज के इंतजार में सोसायटियों और कृषि केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। मजबूरी में उन्हें निजी दुकानों से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है।
मामले को और गंभीर तब बना दिया, जब कृषि विभाग के अधिकारियों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते नजर नहीं आए।
एक ओर उप संचालक कृषि मनोज सिंह का कहना है कि “राज्य स्तर से धान बीज का आवंटन सीमित मात्रा में प्राप्त हुआ है और उपलब्ध स्टॉक का शीघ्र वितरण किया जाएगा।
“वहीं दूसरी ओर एसडीओ कृषि ओमप्रकाश सिंह का बयान सामने आया कि “वर्तमान योजना के तहत विभागीय परियोजना में केवल तिलहन और दलहन के बीज शामिल हैं, धान वितरण का कोई प्रावधान नहीं है।”
इन दोनों बयानों ने किसानों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। यदि धान बीज का प्रावधान नहीं था, तो वितरण की बात क्यों हो रही है? और यदि आवंटन हुआ है, तो किसानों तक बीज पहुंच क्यों नहीं रहा? इन सवालों का जवाब कृषि विभाग को देना होगा।
किसान नेताओं का आरोप है कि समय पर सरकारी बीज उपलब्ध नहीं होने से छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती की लागत बढ़ेगी और उत्पादन भी प्रभावित होगा।
अपना विचार समाचार का मानना है कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग को इस पूरे मामले पर स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। किसानों को भ्रमित करने वाले विरोधाभासी बयानों के बजाय पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाए, पर्याप्त मात्रा में सरकारी धान बीज तत्काल उपलब्ध कराया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में किसानों को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
अपना विचार
किसान का समय सबसे कीमती होता है। यदि बोवनी का समय निकल गया, तो केवल एक फसल नहीं, पूरे वर्ष की मेहनत और उम्मीद दांव पर लग जाएगी।



