कीचड़ में धंसता बचपन, विकास के दावों पर सवाल! पापल की सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत

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कीचड़ में धंसता बचपन, विकास के दावों पर सवाल! पापल की सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत
सिंगरौली/देवसर। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क और शिक्षा की बातें करती है, वहीं देवसर जनपद की ग्राम पंचायत पापल की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। बारिश के बाद सड़क पूरी तरह दलदल में बदल चुकी है। हालात ऐसे हैं कि स्कूली बच्चों को जूते हाथ में लेकर कीचड़ में पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है।
तस्वीरें साफ बता रही हैं कि यह केवल एक खराब सड़क नहीं, बल्कि ग्रामीणों की मजबूरी और प्रशासनिक लापरवाही की कहानी है। रोज इसी रास्ते से गुजरने वाले बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और किसान जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्या लेकर सरपंच प्राणपति साहू के पास पहुंचे तो समाधान के बजाय कथित रूप से उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि, “चाहे 30 बार 181 लगा लो, मुझे किसी का डर नहीं।” यदि यह आरोप सही है, तो यह जनप्रतिनिधि की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की दुर्दशा के कारण एंबुलेंस तक गांव पहुंचने में कठिनाई होती है। बारिश के दिनों में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार दोपहिया वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं और लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं।
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एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की शिकायत का जवाब समाधान होना चाहिए, चुनौती नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक पापल के बच्चे शिक्षा के रास्ते में कीचड़ से लड़ते रहेंगे और कब विकास के दावे जमीन पर उतरेंगे?
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