खुटार मवेशी बाजार में वसूली का खेल? पंचायत क्षेत्र में नगर निगम की पर्चियों पर उठे सवाल

खुटार मवेशी बाजार में वसूली का खेल? पंचायत क्षेत्र में नगर निगम की पर्चियों पर उठे सवाल
सिंगरौली संवाददाता अपना विचार
वैढ़न जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत संचालित खुटार मवेशी बाजार एक बार फिर विवादों और सवालों के घेरे में आ गया है। मवेशी निकासी शुल्क, कथित अवैध वसूली और बाजार संचालन की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन मुद्दों पर समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो मामला व्यापक जांच का विषय बन सकता है।
पंचायत क्षेत्र में नगर निगम की पर्चियां क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पंचायत क्षेत्र में संचालित खुटार मवेशी बाजार में निकासी शुल्क की पर्चियां नगर निगम के नाम से किस आधार पर जारी की जा रही हैं। यदि इसके लिए कोई वैधानिक आदेश या प्रशासनिक व्यवस्था है, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? वहीं यदि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, तो वर्षों से यह प्रक्रिया किन परिस्थितियों और किसके संरक्षण में चल रही है?
व्यापारियों ने लगाए अतिरिक्त वसूली के आरोप
स्थानीय पशु व्यापारियों का आरोप है कि बाजार में निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूली जा रही है। आरोपों के अनुसार बकरियों पर प्रति पशु 20 रुपये तथा बैलों की खरीद-बिक्री पर 500 से 700 रुपये तक लिए जा रहे हैं। कुछ व्यापारियों का यह भी कहना है कि वास्तविक वसूली और रसीदों में अंकित राशि में अंतर रहता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यदि जांच में इनमें सच्चाई सामने आती है तो यह वित्तीय अनियमितता और शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला बन सकता है।
पुरानी शिकायतों पर क्या हुई कार्रवाई?
स्थानीय लोगों के अनुसार मवेशी बाजार में कथित अवैध वसूली को लेकर पूर्व में भी शिकायतें और वीडियो सामने आए थे। बावजूद इसके किसी जांच रिपोर्ट, विभागीय कार्रवाई या जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या शिकायतों को गंभीरता से लिया गया या मामला केवल कागजों तक सीमित रह गया।
42 लाख की बोली प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मवेशी निकासी शुल्क की बोली प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि निकासी व्यवस्था की बोली लगभग 42 लाख रुपये में स्वीकृत हुई थी, लेकिन संपूर्ण राशि जमा नहीं किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं। यदि यह तथ्य सही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बोली की शर्तों का पालन न होने के बावजूद अनुबंध जारी क्यों रहा? क्या संबंधित विभाग ने इसकी समीक्षा की और यदि की, तो उसका परिणाम क्या रहा?
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
सार्वजनिक बाजार व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष संचालन सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में शुल्क वसूली, बाजार संचालन और राजस्व प्रबंधन से जुड़े मामलों में उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना प्रशासन के लिए आवश्यक माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे।
(नोट : समाचार में उल्लिखित अतिरिक्त वसूली और अन्य आरोप स्थानीय व्यापारियों एवं नागरिकों द्वारा लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभाग या प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



