पुराने साथियों से आत्मीय मुलाकातों ने बढ़ाया हौसला, फुले-अम्बेडकरी विचारधारा को मजबूत करने का लिया संकल्प

पुराने साथियों से आत्मीय मुलाकातों ने बढ़ाया हौसला, फुले-अम्बेडकरी विचारधारा को मजबूत करने का लिया संकल्प
विशेष संवाददाता @अपना_विचार
राष्ट्रीय संयोजक सुरेश द्रविड़ ने कहा है कि जीवन में कुछ मुलाकातें केवल औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि वे ऐसी अमूल्य स्मृतियाँ बन जाती हैं जो पूरे जीवन भर प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि विचार, संवेदना, सम्मान और अपनत्व से बने रिश्ते मानवता और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
इसी क्रम में सुरेश द्रविड़, राजा गौतम के साथ वरिष्ठ साथी मू. दिलीप बलिराम अम्बाडे से मिलने उनके निवास पहुंचे। दिलीप अम्बाडे स्वयं रास्ते में उनका स्वागत करने पहुंचे और आत्मीयता के प्रतीक स्वरूप संतरे की मिठाई, बर्फी और पिस्ता भेंट कर उनका आदर-सत्कार किया। वे बामसेफ के पुराने कार्यकर्ता रहे हैं। मुलाकात के दौरान उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में पुनः सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा व्यक्त की और अगले ही दिन फोन कर अपने सक्रिय होने की सूचना भी दी।
सुरेश द्रविड़ ने कहा कि पुराने साथियों से समय-समय पर मिलना और संवाद बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है और सामाजिक आंदोलन को नई ऊर्जा मिलती है।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष वे अपने परिवार सहित साथी मू. जीवन गावंडे और मू. प्रदीप बनसोडे के यहां भी ठहरे थे, जहां उन्हें भरपूर स्नेह और आत्मीयता मिली। आज भी उनका परिवार उन यादों को स्नेहपूर्वक याद करता है।
उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन आत्मीय मुलाकातों की यादें हमेशा हृदय में जीवित रहती हैं। यही स्मृतियां आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करती हैं।
राष्ट्रीय संयोजक सुरेश द्रविड़ ने कहा कि वे लगातार लोगों से मिलते रहेंगे और फुले-अम्बेडकरी आंदोलन तथा विचारधारा को मजबूत करने के लिए संवाद और संगठन विस्तार का अभियान जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा,
“कुछ मुलाकातें समय के साथ समाप्त नहीं होतीं, वे स्मृतियों में इतिहास बनकर सदैव जीवित रहती हैं।”
— सुरेश द्रविड़, राष्ट्रीय संयोजक, #NCCMBO



