एमपी में स्वास्थ्य सेवाओं का PPP मॉडल, रीवा-देवास-गुना के 18 CHC निजी संस्थाओं को सौंपने की तैयारी
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे एमपी में 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निजी प्रबंधन को सौंपे जाएंगे

एमपी में सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी, रीवा-देवास-गुना के 18 स्वास्थ्य केंद्र चिन्हित
अपना विचार भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक नई पहल के तहत रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) के संचालन को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर निजी संस्थाओं को सौंपने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था प्रारंभिक तौर पर पांच वर्ष के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जाएगी।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद चयनित निजी संस्थाएं इन स्वास्थ्य केंद्रों के दैनिक संचालन, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति तथा स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी। जबकि भवन, दवाइयों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचा सरकार के नियंत्रण में ही रहेगा।
सरकार का कहना है कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के हजारों पद खाली हैं, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि इस निर्णय को लेकर स्वास्थ्य अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्ष ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में देने के बजाय रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती कर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।
यदि पांच वर्षों के मूल्यांकन में यह मॉडल सफल पाया जाता है, तो इसे प्रदेश के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।



